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Court Marriage Procedure, Acts, Eligibility & Age In India

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Court Marriage

Court Marriage: हेलो फ्रेंड्स, इस पोस्ट में हम कोर्ट मैरिज के बारे में बात करेंगे। कोर्ट मैरिज कैसे की जाती है, कोर्ट मैरिज करने में कितना टाइम लगता है, कितना खर्चा आता है, किस एक्ट में कोर्ट मैरिज की जाती है, कोर्ट मैरिज के लिए क्या उम्र चाहिए होती है और शादी के वक़्त में कोर्ट में पूछे जाने वाले सभी सवालों के जवाब आपको इस आर्टिकल में मिलेंगे। 

Court Marriage Acts – कोर्ट मैरिज एक्ट

कोर्ट मैरिज करने के लिए 3 तरह के एक्ट होते है। 

  1. Hindu Marriage Act
  2. Muslim Marriage Act
  3. Special Marriage Act 

Process of Hindu Court Marriage – हिंदू कोर्ट मैरिज की प्रक्रिया

अगर युवक और युवती एक दूसरे से विवाह करना चाहते है तो उन्हें सबसे पहले आर्य समाज मंदिर में विवाह करना होगा। कोर्ट मैरिज करने के लिए जब आप किसी वकील को हायर करते है तो वो पहले आपका विवाह आर्य समाज मंदिर करवाते है। हिन्दू रीतिरिवाज से शादी होना जरुरी होता है। वहा पर आपके अग्नि के सामने 7 फेरे कराये जाते है और आपको मैरिज सर्टिफिकेट मिल जाता है। 

आर्य समाज मंदिर विवाह सर्टिफिकेट और कुछ फोटोग्राफ्स प्रोवाइड कराते है जिसको विवाह प्रूफ के तौर पर कोर्ट में सबमिट करना होता है। आर्य समाज मंदिर विवाह करने के लिए गवर्नमेंट के साथ रजिस्टर्ड होते है। आर्य समाज का विवाह सर्टिफिकेट गवर्नमेंट से सर्टिफाइड होता है। 

जब आप विवाह सर्टिफिकेट और अपने कुछ पर्सनल डाक्यूमेंट्स को कोर्ट में सबमिट करते है तब कोर्ट आपके सर्टिफिकेट के आधार पर मैरिज रजिस्ट्रार में आपका रजिस्ट्रेशन करता है। 

मैरिज रजिस्ट्रार में जा कर जब दोनों युवक और युवती हस्ताक्षर करते है और मैरिज रजिस्ट्रार से आपको जो सर्टिफिकेट मिलता है वो आपका मैरिज सर्टिफिकेट कहलायेगा। 

Hindu Marriage Act, 1955 All Sections  

फ्रेंड्स हिन्दू मैरिज एक्ट, 1955 में ऐसे विवाहों के बारे में विस्तार से नियम बताया हुआ है जिसके अंतर्गत कोई हिन्दू युवक या युवती एक दूसरे से विवाह करना चाहते है तो वो ऐसा कर सकते है। 

हिन्दू मैरिज एक्ट ,1955 में शादी करने के लिए लड़के की आगे 21 इयर्स और लड़की की आगे 18 इयर्स होना जरुरी है। 

हिन्दू विवाह करने के लिए हिन्दू मैरिज एक्ट धरा 5 में ये जानकारी दी हुई है की हिन्दू विवाह की रस्मों में सप्तपदी रसम मतलब अग्नि (फायर) के साथ 7 फेरे लेने की प्रक्रिया को सप्तपदी कहते है। हिन्दू विवाह के लिए कानूनन सप्तपदी रसम का पूरा होना आवश्यक है। यदि सप्तपदी का प्रूफ कोर्ट में दिया जाये तो विवाह वैध माना जायेगा। 

Hindu Marriage Act धारा 5 में कुछ ऐसी शर्ते भी दी गयी है जिनका पालन करना जरुरी है। अगर उन शर्तो का पालन नहीं किया जाता है तो शादी वैध नहीं मानी जाएगी। इन शर्तों में से मुख्य शर्त ये है की जिस समय युवक और युवती विवाह कर रहे है तो उन दोनों में से किसी का भी पहले से कोई जीवित पति या पत्नी न हो। 

दोनों का अविवाहित होना जरुरी है या फिर उनके पति या पत्नी की मृत्यु हो चुकी हो। पति या पत्नी के जीवित रहते हुए दूसरी शादी नहीं की जा सकती है। 

Process of Muslim Court Marriage – मुस्लिम कोर्ट मैरिज की प्रक्रिया

मुस्लिम कोर्ट मैरिज का प्रोसेस भी कुछ कुछ हिन्दू मैरिज जैसा ही है। अगर मुस्लिम युवक युवती विवाह करना चाहते है तो युवक की उम्र 21 से जायदा और युवती की उम्र 18 साल से जायदा होनी चाहिए। दोनों के पास उनके सारे डाक्यूमेंट्स होने चाहिए जैसे कि उनका आधार कार्ड, बर्थ सर्टिफिकेट या उनका ड्राइविंग लाइसेंस, दोनों के 6 फोटोज और साथ में 2 विटनेस। 

काजी से निकाह पढ़वाया जाता है और युवक युवती को निकाहनामा दिया जाता है.निकाहनामा एक तरह का सर्टिफिकेट होता है। सर्टिफिकेट में काजी साहब और दोनों युवक युवती के हस्ताक्षर होते है। निकाहनामा सर्टिफिकेट से कोर्ट, मैरिज रजिस्ट्रार में मैरिज रजिस्टर करता है।

ये सब एक ही दिन में किया जाता है मतलब एक ही दिन में आपका निकाह पढ़ा जाता है और उसी दिन कोर्ट में मैरिज रजिस्टर होती है । 

Process of Speical Court Marriage – स्पेशल कोर्ट मैरिज की प्रक्रिया

अगर कोई अलग अलग जाती या धर्म के युवक और युवती एक दूसरे से कोर्ट मैरिज करना चाहते है तो वह स्पेशल कोर्ट मैरिज एक्ट में आती है। स्पेसल कोर्ट मैरिज एक्ट दोनों युवक या युवती में से किसी का भी धर्म परिवर्तन नहीं किया जाता है। उदाहरण के लिए बॉलीवुड अभिनेता अभिनेत्री सैफ अली खान या करीना कपूर की शादी स्पेशल कोर्ट मैरिज एक्ट से हुई है।

स्पेशल कोर्ट मैरिज में एक नोटिस इशू किया जाता है जिसको कोर्ट या मैरिज रजिस्ट्रार ऑफिस पब्लिक्ली ऑफिसियल दिवार/नोटिस बोर्ड पर लगाया जाता है। कोर्ट से किसी भी तरह का नोटिस आपके घर पर नहीं भेजा जाता है। 

Caution after court marriage – कोर्ट मैरिज करने के बाद की सावधानी

उम्मीद है फ्रेंड्स आप अब समझ चुके होंगे की कोर्ट मैरिज कैसे की जाती है। कोर्ट मैरिज के लिए युवक और युवती के डाक्यूमेंट्स पूरे होने चाहिए और 2 गवाह की भी जरुरत होती है।

अगर गवाह नहीं है तो वकील से कह कर आप गवाह का भी इंतज़ाम कर कर सकते है. गवाह के लिए वकील आपसे कुछ चार्जेज लेते है। 

कोर्ट मैरिज के बाद दोनों युवक युवती अपने परिवार को अपने विवाह के बारे में सूचित जरूर करे। 

कोर्ट मैरिज के बाद पुलिस प्रोटेक्शन जरूर ले. हो सकता है आपकी कोर्ट मैरिज से आपके फॅमिली या रिलेटिव्स को कोई ऑब्जेक्शन हो इस तरह के मामलो में हाथापाई और मारपीट होने की संभावना बहुत होती है। 

युवक और युवती को जान से मार देने की धमकियां भी बहुत दी जाती है। पुलिस प्रोटेकशन आपको डिस्ट्रिक्ट कोर्ट, हाई कोर्ट या एसएसपी को एप्लीकेशन दे कर भी ली जा सकती है। 

Final words – अंतिम शब्द

मेरी पर्सनल सलाह यही है की अगर आप कोर्ट मैरिज करना चाहते है तो इसके बारे में आपने परिवार को बता दीजिये। परिवार की सहमति से विवाह करना जयदा अच्छा है।

अब भी अगर आपके मन में कोर्ट मैरिज को लेकर कोई सवाल है तो मुझे कमेंट बॉक्स में कमेंट कर के बताये। 

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